कविता -15-Dec-2021
रौशनी के शहर में उजाले की कमी है......
रोशनी से भरा
इक शहर जिसकी सड़कें
जगमगाती हैं दूर तक जाती है
में कई अंधेरी गली है
इंसान तो है पर इंसानियत नहीं है
भीड़ का शोर बहुत है पर
एकांत में
उजाले की कमी है
पहचान तो बहुत है आईनों की कमी है
चमकते सितारे खो गए दौलत के नशे में
नशा एसा की शराब को भी शर्मिंदगी है
कोई जलता जो चिराग कहीं किसी गली में
फूंक कर बुझा दे रोशनी का यह शहर
बस्ती भी इसकी कीचड़ से सनी है
इस रोशनी के शहर में उजाले की कमी है
मिटा दे जो तम को दिलों के,
उ ्न चिरागों के जलने की उम्मीदें
बड़ी है।।
शैलजा 😊
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
Gunjan Kamal
15-Dec-2021 07:25 PM
शानदार प्रस्तुति 👌👌
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Pallavi
15-Dec-2021 06:34 PM
Nice
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Priyanka Rani
15-Dec-2021 06:12 PM
Nice
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